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Bhartiya Pashu  Palak Jan Kalyan Vikas Yojana

Bhartiya Pashu Palak Jan Kalyan Vikas Yojana

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About Bhartiya Pashu Palak Jan Kalyan Vikas Yojana

भारतीय पशुपालन योजना

गरीब, किसान, पशुपालक एवं ग्रामीण बेरोजगारों के कल्याण हेतु परियोजना

1. योजना का परिचय

भारतीय पशुपालन योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब, निम्न एवं मध्यम वर्गीय किसानों, पशुपालकों, ग्रामीण युवाओं तथा बेरोजगार लोगों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है। वर्तमान समय में गुणवत्तापूर्ण एवं शुद्ध दूध का उत्पादन तथा उसकी उपलब्धता एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने तथा ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

इस योजना का उद्देश्य गाँव एवं ग्राम पंचायत स्तर पर पशुपालकों को संगठित एवं गतिशील बनाना तथा ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को उनके अपने गाँव में ही रोजगार उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।

संस्था द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा। गाय पालक किसानों को दूध के अतिरिक्त गाय के गोबर एवं गौमूत्र से जैविक खाद तथा अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

संस्था के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण प्राप्त कर कार्य करने वाले किसानों से संस्था द्वारा उनके यहाँ उत्पादित गोबर की खाद एवं गौमूत्र जैसे उत्पादों को उचित व्यवस्था एवं लागू नियमों के अनुसार खरीदने तथा बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

2. पंचायत स्तर पर दुग्ध प्रसंस्करण इकाई

यदि किसी ग्राम पंचायत में लगभग 1,000 पशुपालक संस्था से जुड़ते हैं और प्रत्येक पशुपालक कम से कम एक जोड़ी गाय पालने की दिशा में कार्य करता है, तो संस्था द्वारा उस पंचायत में दूध संग्रहण एवं प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

इससे किसानों को उनके दूध का उचित एवं पारदर्शी मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है तथा स्थानीय स्तर पर दूध के प्रसंस्करण एवं विपणन को बढ़ावा मिलेगा।

संस्था से जुड़ने वाले किसानों का आवश्यक विवरण निर्धारित नियमों एवं सहमति के अनुसार संबंधित विभागों/सरकारी योजनाओं में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि पात्र किसानों को उपलब्ध सरकारी पशुपालन योजनाओं, प्रशिक्षण, ऋण, अनुदान अथवा अन्य सुविधाओं का लाभ दिलाने में सहायता की जा सके।

3. सदस्यता

संस्था की सदस्यता शुल्क ₹750 निर्धारित की जा सकती है।

सदस्यता के संबंध में संस्था द्वारा सदस्य को आवश्यक पहचान/सदस्यता दस्तावेज तथा योजना से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

4. योजना के मुख्य उद्देश्य

संस्था की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य पशुपालन को पारंपरिक गतिविधि से आगे बढ़ाकर व्यावसायिक एवं रोजगारोन्मुख गतिविधि के रूप में विकसित करना है।

इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—

  • पशुपालकों एवं किसानों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना।
  • ग्रामीण बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उत्पन्न करना।
  • ग्राम पंचायत स्तर पर पशु सेवा केंद्र स्थापित करने को बढ़ावा देना।
  • पशुपालकों को पशु चिकित्सा एवं पशु स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का प्रयास करना।
  • कृत्रिम गर्भाधान एवं पशु प्रजनन संबंधी प्रशिक्षण को बढ़ावा देना।
  • पशुपालन प्रबंधन का प्रशिक्षण देकर कुशल पशुपालक एवं पशु सेवा कार्यकर्ता तैयार करना।
  • आधुनिक डेयरी फार्म, भेड़ पालन, बकरी पालन तथा अन्य पशुपालन इकाइयों की स्थापना हेतु मार्गदर्शन प्रदान करना।
  • पशु स्वास्थ्य एवं पशु कल्याण के प्रति सामाजिक जागरूकता पैदा करना।
  • पशुओं के प्रति क्रूरता एवं अत्याचार के विरुद्ध लोगों में जागरूकता उत्पन्न करना।
  • पशुओं के पोषण, स्वास्थ्य एवं देखभाल से संबंधित अच्छी प्रथाओं को बढ़ावा देना।
  • दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध प्रसंस्करण को बढ़ावा देना।
  • किसानों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सहायता करना।
  • पशु चारा एवं पशुपालन से संबंधित आवश्यक सामग्री उचित एवं पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराने का प्रयास करना।

5. पशु सेवा केंद्र

पशुपालन को बढ़ावा देने तथा पशु चारा एवं अन्य आवश्यक सामग्री को उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत स्तर पर पशु सेवा केंद्र स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

इन केंद्रों के माध्यम से पशुपालकों को निम्नलिखित सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा—

  • पशु स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिक सहायता।
  • पशु चिकित्सा सेवाओं तक पहुँच।
  • पशु चारा एवं पशुपालन सामग्री।
  • पशुओं से संबंधित उत्पादों की खरीद एवं बिक्री में सहायता।
  • उन्नत नस्ल एवं प्रजनन संबंधी जानकारी।
  • जैविक खाद एवं अन्य कृषि उपयोगी उत्पादों की जानकारी।
  • पशुपालन संबंधी प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन।

6. “एक गाँव, एक प्रशिक्षण, एक रोजगार” परियोजना

संस्था द्वारा “एक गाँव, एक प्रशिक्षण, एक रोजगार” नामक परियोजना को बढ़ावा देने का उद्देश्य है।

इसके अंतर्गत ग्रामीण युवाओं को उनकी रुचि एवं स्थानीय आवश्यकता के अनुसार पशुपालन, डेयरी, बकरी पालन, मत्स्य पालन, कृषि, जैविक खाद निर्माण तथा अन्य रोजगारोन्मुख कार्यों का प्रशिक्षण देने का प्रयास किया जाएगा।

भविष्य में देश के विभिन्न राज्यों के गाँवों में पशु सेवा केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

7. छोटे किसानों के लिए मिलेट उत्पादन

जिन किसानों के पास लगभग 1 से 2 एकड़ कृषि भूमि है, उन्हें मिलेट उत्पादन के लिए उपलब्ध योजनाओं एवं संसाधनों के अनुसार खाद, बीज एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

किसानों द्वारा उत्पादित मिलेट को उचित बाजार एवं मूल्य उपलब्ध कराने के लिए संस्था द्वारा बाजार से जोड़ने की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा।

8. पशुपालन प्रशिक्षण एवं रोजगार

संस्था द्वारा पशुपालन, डेयरी, बकरी पालन, मत्स्य पालन, पशु पोषण, पशु देखभाल एवं संबंधित कार्यों का प्रशिक्षण प्रदान कर ग्रामीण युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

संस्था से जुड़ने वाले पात्र सदस्यों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं के अंतर्गत पशुपालन ऋण, अनुदान अथवा अन्य सुविधाओं के लिए आवेदन करने में मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान की जाएगी।

9. गाय एवं भैंस पालकों के लिए सहायता

गाय एवं भैंस पालक किसानों को सरकार द्वारा संचालित पात्र योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में आवश्यक जानकारी, दस्तावेजी सहायता एवं आवेदन प्रक्रिया में मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

10. कृत्रिम गर्भाधान एवं पशु सेवा

संस्था द्वारा कृत्रिम गर्भाधान एवं पशु स्वास्थ्य संबंधी प्रशिक्षण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। निर्धारित सरकारी नियमों, मानकों एवं आवश्यक अनुमति के अनुसार लगभग 10 किलोमीटर के क्षेत्र में पशु सेवा केंद्र विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा सकता है।

किसी भी तकनीकी अथवा चिकित्सा सेवा का संचालन केवल संबंधित विभाग के लागू नियमों एवं अधिकृत व्यक्तियों द्वारा ही किया जाएगा।

11. कृषि-पशुपालन कार्ड

जो लोग संस्था की सदस्यता ग्रहण करेंगे, उन्हें संस्था की ओर से कृषि-पशुपालन सदस्यता/पहचान कार्ड उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा सकती है।

योजना से संबंधित किसी भी सरकारी लाभ का वास्तविक अधिकार संबंधित सरकारी योजना की पात्रता, नियम एवं स्वीकृति पर निर्भर करेगा। केवल संस्था का कार्ड होना किसी सरकारी लाभ की गारंटी नहीं माना जाएगा।

बकरी पालन योजना

जो व्यक्ति बकरी पालन करना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले संस्था को अपना आवश्यक विवरण उपलब्ध कराना होगा। सदस्यता एवं आवश्यक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पात्रता तथा उपलब्ध योजना के अनुसार बकरी पालन इकाई स्थापित करने हेतु मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान की जाएगी।

बकरी पालन इकाई स्थापित करने के इच्छुक व्यक्ति के पास लगभग 2,000 वर्ग फीट भूमि उपलब्ध होना आवश्यक बताया गया है। इच्छुक व्यक्ति को बकरी पालन का प्रोजेक्ट तैयार कर संस्था को देना होगा।

प्रोजेक्ट को आवश्यकतानुसार संबंधित राज्य सरकार के पशुपालन विभाग तथा केंद्र सरकार की कृषि/पशुपालन संबंधी योजनाओं के अंतर्गत प्रस्तुत करने में संस्था द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा।

बकरियों की संख्या, सहायता, ऋण या अन्य सुविधा संबंधित योजना की पात्रता एवं स्वीकृति के अनुसार होगी।

मत्स्य पालन योजना

जो व्यक्ति मत्स्य पालन करना चाहते हैं, उन्हें अपने तालाब/पोखर का विवरण, उपलब्ध क्षेत्रफल तथा कितने एकड़ में मत्स्य पालन करना चाहते हैं, इसकी जानकारी संस्था को उपलब्ध करानी होगी।

आवेदक द्वारा मत्स्य पालन से संबंधित परियोजना/प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर संस्था को दी जाएगी। संस्था द्वारा उपलब्ध सरकारी योजनाओं एवं नियमों के अनुसार मार्गदर्शन तथा संबंधित विभाग से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

सदस्यता एवं सहयोग राशि

जो व्यक्ति संस्था से जुड़ना अथवा संस्था के साथ कार्य करना चाहते हैं, उन्हें संस्था के निर्धारित नियमों के अनुसार सदस्यता/सहयोग राशि जमा करनी होगी।

प्रस्तावित सहयोग राशि: ₹750 (सात सौ पचास रुपये)

सदस्यता या सहयोग राशि जमा करने से किसी सरकारी योजना में ऋण, अनुदान, पशु, रोजगार अथवा अन्य लाभ की स्वतः गारंटी नहीं होती। सभी लाभ संबंधित योजना की पात्रता एवं सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति पर निर्भर होंगे।

A1 एवं A2 दूध की जानकारी

A1 और A2 दूध में मुख्य अंतर उनके बीटा-कैसिइन प्रोटीन के प्रकार से संबंधित है।

A1 दूध

A1 दूध में A1 प्रकार का बीटा-कैसिइन प्रोटीन पाया जाता है। कुछ गायों की नस्लों में A1 बीटा-कैसिइन से संबंधित आनुवंशिक प्रकार पाया जा सकता है।

पाचन के दौरान A1 बीटा-कैसिइन से बीटा-कैसोमोर्फिन-7 (BCM-7) नामक पेप्टाइड बन सकता है। कुछ शोधों में A1 बीटा-कैसिइन तथा कुछ स्वास्थ्य प्रभावों के बीच संभावित संबंधों पर अध्ययन किया गया है, लेकिन इन स्वास्थ्य दावों के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण अभी निर्णायक नहीं माने जाते।

A2 दूध

A2 दूध में A2 प्रकार का बीटा-कैसिइन प्रोटीन होता है। A2 बीटा-कैसिइन के पाचन से A1 बीटा-कैसिइन की तुलना में BCM-7 बनने की प्रक्रिया अलग होती है।

कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि कुछ लोगों को A2 दूध सामान्य दूध की तुलना में पाचन की दृष्टि से अधिक सुविधाजनक लग सकता है। हालांकि, इसे सभी लोगों के लिए अधिक स्वास्थ्यवर्धक या किसी बीमारी का उपचार मानना उचित नहीं है।

A1 और A2 दूध में मुख्य अंतर

  • प्रोटीन: A1 दूध में A1 बीटा-कैसिइन तथा A2 दूध में A2 बीटा-कैसिइन होता है।
  • आनुवंशिक अंतर: गाय के जीन में मौजूद बीटा-कैसिइन प्रकार के आधार पर दूध A1 या A2 प्रकार का हो सकता है।
  • पाचन: कुछ लोगों को A2 दूध पचाने में अपेक्षाकृत सुविधा हो सकती है।
  • पोषण: दोनों दूध में प्रोटीन, वसा, कैल्शियम, विटामिन एवं अन्य पोषक तत्व होते हैं; वास्तविक पोषण नस्ल, आहार, दूध की गुणवत्ता एवं प्रसंस्करण पर भी निर्भर करता है।
  • उपलब्धता: A1 दूध सामान्य रूप से अधिक व्यापक रूप से उपलब्ध है, जबकि A2 दूध का उत्पादन एवं बाजार धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
  • कीमत: A2 दूध कुछ बाजारों में सामान्य दूध की तुलना में महंगा हो सकता है।

A1 और A2 दूध के संबंध में सावधानी

A1 एवं A2 दूध को लेकर कई स्वास्थ्य संबंधी दावे किए जाते हैं। कुछ शोधों में संभावित अंतर पर अध्ययन हुआ है, लेकिन A1 दूध को हृदय रोग, मधुमेह या अन्य गंभीर बीमारियों का कारण तथा A2 दूध को इन रोगों से बचाने वाला दूध मानने के लिए पर्याप्त निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।

इसलिए उपभोक्ताओं को दूध का चुनाव करते समय उसकी स्वच्छता, गुणवत्ता, पोषण, व्यक्तिगत सहनशीलता और चिकित्सकीय सलाह को ध्यान में रखना चाहिए।

योजना का व्यापक उद्देश्य

भारतीय पशुपालन योजना का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन एवं कृषि को बढ़ावा देना, किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना, ग्रामीण युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ना तथा पशुपालकों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं तक पहुँचाने में सहायता करना है।

संस्था द्वारा पशुपालन, कृषि, डेयरी, गाय पालन, भैंस पालन, बकरी पालन, मत्स्य पालन, मिलेट उत्पादन, जैविक खाद तथा ग्रामीण रोजगार से संबंधित गतिविधियों को लागू सरकारी नियमों, विभागीय दिशा-निर्देशों एवं पात्रता मानकों के अनुसार संचालित करने का प्रयास किया जाएगा।

महत्वपूर्ण सूचना: किसी भी सरकारी योजना, ऋण, अनुदान, पशु वितरण, प्रशिक्षण, सरकारी मान्यता अथवा लाभ का दावा तभी किया जाएगा जब संबंधित विभाग/सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसकी वास्तविक स्वीकृति एवं पात्रता उपलब्ध हो। संस्था की सदस्यता अथवा शुल्क जमा करना सरकारी लाभ की गारंटी नहीं है।

 

 

 

 

 

 

 

 

ALFATIMA HUMAN RESOURCES DEVELOPMENT FOUNDATION | Skill Development, Employment & Social Welfare Organization